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गाँधी परिवार का एक रोचक अद्भुत रहस्य -

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मैं पहली बार आपको सोनिया गाँधी या यूँ कहें कि गाँधी परिवार जिसे अपनी धरोहर समझ बैठा है वो गलत फहमी की जगह उत्तर प्रदेश के केंद्र और प्रदेश की आपसी चिडचिडाहट तथा अफवाहों से भरे V.V.I.P. जैसे भ्रमित करने वाले शब्दों को जो कि एक गाली की तरह महसूस करते शहर रायबरेली की एक अत्यंत दुर्लभ तथा रोचक अनसुलझे रहश्य को आप के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ -

वैसे तो रायबरेली में जब तब विकास की अफवाहें फ़ैलाने के लिए गाँधी परिवार से कोई न कोई आता जाता रहता है और वह आने के लिए किसी भी मार्ग का प्रयोग कर सकते हैं या यूँ कहें कि प्रयोग करने में सच्क्षम हैं किन्तु प्रत्येक पाँच वर्ष में उन्हें वो मार्ग अपनाना पड़ता है जिसे सायद यदि उनकी मज़बूरी न हो तो उस तरफ देखना भी पसंद न करें ! वह मार्ग प्रत्येक पाँच सालों में एक बार ही सड़क कहलाने का हक़ प्राप्त कर पता है ! वह भी तब तक जब तक गाँधी परिवार का काफिला उस मार्ग से गुजर न जाये तब तक !

आखिर क्या है उस मार्ग की खासियत जिसकी चर्चा हम लगातार करते जा रहे हैं ! कहानी उस समय की है जब कभी भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरागाँधी रायबरेली से सांसद हुआ करती थीं ! वह भी रायबरेली में विकास की गंगा बहाने की अफवाहें फ़ैलाने के लिए किसी भी मार्ग का प्रयोग कर लिया करती थी किन्तु जब उन्हें इस रायबरेली से कुछ पाना होता था तो उनके पास सिर्फ एक ही रास्ता होता था और वह था अपने दुर्भाग्य को कोसता हुआ घंटाघर से मालिकमऊ घोसियाना रोड जो कि आज एक पुराना इतिहास बन के रह गया ! उन्हें यह विस्वास था कि यदि हम इस मार्ग से अपना नामांकन करने जायेंगे तो हम निश्चित ही विजयी होगे किन्तु 1977 के चुनाव में उन्होंने इस मार्ग का प्रयोग नहीं किया और उसका परिणाम सबके सामने आ गया और वह चुनाव हार गयीं ! तब से लेकर आज तक गाँधी परिवार जब भी इस रायबरेली से ताज पाने के लिए आता है तो वह इसी मार्ग का सहारा लेता है !

इस प्रकार के अद्भुत मार्ग को यदि स्वर्ग की सीढ़ी या जन्नत का रास्ता कहें तो सायद कम होगा !

इस समय यह मार्ग शायद यही कह रहा होगा कि चुनाव कब आओगे ? क्यों कि चुनाव के समय इसके उपर लेप लगा कर इसे सड़क का रूप प्रदान किया जाता है !

वास्तव में आज रायबरेली की सरहद में यदि कोई आता है तो उसे किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं पड़ती जिस स्थान से मार्ग समाप्त हो कर उबड़ – खाबड़ रस्ते में तब्दील हो जाये वहीँ से समझ लेना कि रायबरेली की सीमा में आपने प्रवेश कर लिया है !

न जाने यह जनता कब तक अपने दर्द को छुपाती रहेगी और इनमें आशा की झूंठी किरण देखेगी !

किन्तु मुझे इस पर एक पंक्ति याद आती है कि -

इन हांथों में शक्ति अगर है राज तिलक देने की, तो इन हांथों में शक्ति भी है सर उतार लेने की !!

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahulpriyadarshi के द्वारा
October 1, 2011

बहुत खूब चंद्रजीत जी,आपने इस बात को सामने लाकर निश्चय ही हमें नयी जानकारी दी है,इसके लिए आपका धन्यवाद,अंत में भी आपने बहुत अच्छी बात कही है ,मैं आपके इस लेख की प्रशंसा करता हूँ.

syeds के द्वारा
September 30, 2011

रायबरेली की दशा पर अच्छा लेख.. बेशक कोई भी क्षेत्र चाहे वी आई पी का हो या न…आज कमोबेश इसी हालत में है… अच्छे लेख के लिए बधाई के पात्र हैं.. http://syeds.jagranjunction.com


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