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chandrajeet


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चितम्बरम को बचाने का प्रयास क्यों ?

Posted On: 28 Sep, 2011  
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3 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: अजय कुमार झा अजय कुमार झा

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय  चन्दर जी सच  है कि सारे सांसद प्रत्यक्ष  भ्रष्टाचारी नहीं हैं,  किन्तु आप भ्रष्टाचार होते खामोशी से देख  रहें है, उनके विरुद्ध  निष्पक्ष  आवाज  नहीं उठा रहें  है, तो आप  निश्चित  ही उस  अपराध  के भागीदार  कहलायेगे जो आपने नहीं किया है।  यदि आप रोज  रोज  मदिरालय में लोंगो को मदिरा पीते हुये  देखोंगे तो कभी न कभी आपकी भी इच्छा हो जायेगी मदिरा चखने की। और व्यक्ति इच्छा से ही भ्रष्टाचारी बननता है। मैं सबको बलात्कारी और हत्यारा तो नहीं कह सकता लेकिन सभी सांसदों का भ्रष्टारी कह सकता हूँ। अब वो हमसे न कहें कि मेरे भ्रष्टचारी होने का सबूत दो, बल्कि हम  उनसे कहें आप  हमें अपने भ्रष्टाचारी न  होने का सबूत  दें। क्या किसी नेता के पास  है ऐसा सबूत  कि वह उसे भ्रष्टाचरी न होने का प्रमाण पत्र दे सके। शायद नहीं...

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

सच है चुनाव घोषित होते ही उत्तर प्रदेश के रायबरेली क्षेत्र में बहार आ जाती है क्यूंकि ये गाँधी परिवार का पसंदीदा चुनावी क्षेत्र है !वोटो की राजनीति के खेल में जेल में रहने पर किसी को सहानुभूति नहीं मिलती ,आज जनता बेबस जरुर है पर बेवकूफ नहीं !अगर बाहुबली को जनता का समर्थन प्राप्त है तो जनता उनकी खूबियों से जरुर परिचित है ,फिर वो चाहे जेल में रहे या जेल से बाहर! लेकिन ये भी सच है कोई भी नेता किसी से कम नहीं है बस अन्तर केवल कम या ज्यादा होने का है !कहते है चोर वही है जो पकड़ा जाये !कोई इमानदार नहीं है बस मौका मिलने की बात है ,जिसे मौका नहीं मिलता वो दुसरे को भ्रष्ट कहता है अगर उसे भी मौका मिल जाये तो वो उससे भी बड़ा भ्रष्ट साबित होगा !आप वहा २० सालो से रह रहे है !कितने चुनावों के रंग आपने देखे है ! ये अच्छी बात है कि उत्तर प्रदेश को बाहुबली जैसा नेता हासिल है ,पर सोचने वाली बात ये है कि जिस इंसान को शहर के अन्दर चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान, व्यापारी हो या सरकारी कर्मचारी सभी इस बाहुबली से भय न खाकर गर्व महसूस करते हैं उसने आज तक उनके लिए क्या किया है ?

के द्वारा: D33P D33P

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: naturecure naturecure

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

शर्मा जी हमारा मतलब यह कदापि नहीं है कि कवि कि रचना एक कल्पना है लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन पर आंख मूंद कर विस्वाश नहीं करना चाहिए यदि किसी ग्रन्थ को पढ़ने से पहले ही उसके पात्र के उद्देश्य निश्चित कर दिए जाएँ तो वह वैसा ही समझ में आता है रामायण पढने से पहले ही यदि आप रावण को नकारात्मक मान लें तो पूरी पुस्तक में वह नकारात्मक, नकारात्मक ही रहेगा लेकिन यदि आप न रावण ख़राब न राम सही मान कर अध्ययन करेंगे तो उसका वास्तविक चेहरा सामने आता है यही मान कर मैंने इसपर यह अध्ययन किया ! क्योंकि यह भी कहा जाता है कि तुलसीदास को अकबर ने ६०,००० स्वर्ण मुद्राएँ देकर रामचरितमानस कि रचना करवाई थी लेकिन यह सत्य नहीं ! यदि यह सत्य होता तो इस प्रकार के अदभुत रहस्य कदापि न होते...छमा करें मेरा उद्देश्य किसी भी प्रकार से उपदेश देने का बिलकुल नहीं है आप लोगों से हम सीखने को मिलता है उसका मैं आभारी हूँ !

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

के द्वारा: chandrajeet chandrajeet

के द्वारा: nishamittal nishamittal




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